Friday, February 22, 2008

सुदर्शन फ़ाकिर को विनम्र श्रद्धांजलि

अपनी खूबसूरत गज़लों और नज़्मों से लाखों लोगों के दिल में बसे सुदर्शन फ़ाकिर के देहांत की खबर किसी भी संगीत-प्रेमी के लिये महज़ एक साधारण खबर नहीं हो सकती. हम में से अधिकतर लोग उनकी शायरी को सुनते हुये बड़े हुये हैं, शायर के नाम से परिचित भले न हों. जीवन की साधारण बातों को असाधारण खूबसूरती से शायरी में पिरो देने में फ़ाकिर साहब का कोई सानी नहीं था. वे सदा हमारे दिलों में बसे रहेंगे.

झूठा है जो कहता है कि फ़ाकिर नहीं रहे
क्या जहाँ में उस कलाम के शाकिर नहीं रहे

तो आइये आज फ़ाकिर साहब को याद करते हुये उनके कुछ नगमें सुनते हैं. सबसे पहले ज़िंदगी से एक संवाद:
ज़िंदगी तुझ को जिया है:

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और इसके बाद:
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें:

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उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िंदगी:

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फ़ाकिर साहब के कुछ और नग्मों के लिये रेडियोवाणी (युनुस खान) और ’एक शाम मेरे नाम’ (मनीष) ज़रूर देखें.

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: Sudarshan_Faqir, सुदर्शन-फ़ाकिर, गज़ल, Gazal,

2 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

सचमुच. फाकिर साहब महान शायर थे. एक से एक अच्छी गजल लिखीं उन्होंने. इस पोस्ट के लिए आपको साधुवाद.

Manish said...

सही कहा आपने...बशीर बद्र, निदा फ़ाजली के साथ सुदर्शन फ़ाकिर ने अपनी ग़ज़लों से एक पूरी पीढ़ी को आनंदित किया है।